शिशु को होने वाले सामान्य रोग कौन कौन से हैं?HealthPlanet

Posted on Mon 17th Oct 2022 : 13:45

शिशु को होने वाले सामान्य रोग कौन कौन से हैं?

बुखार
नन्हें शिशुओं को तेज बुखार होना काफी असामान्य बात है, इसलिए यदि आपके शिशु को तेज बुखार हो तो यह इस बात की चेतावनी है कि कुछ गड़बड़ है। छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में बुखार ज्यादा गंभीर समस्या होता है, वहीं तीन माह से कम उम्र के शिशुओं में यह और भी ज्यादा गंभीर होता है। निम्न स्थितियों में आपको तुरंत शिशु के डॉक्टर से बात करनी चाहिए:

शिशु की उम्र तीन महीने से कम है और उसे 100.4 डिग्री फेहरहाइट या इससे ज्यादा बुखार है
शिशु की उम्र छह महीने से कम है और उसे 102.2 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार है

सांस संबंधी समस्याएं
यदि शिशु को सांस लेने में बहुत जोर लगाना पड़ रहा है या सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो तुरंत एम्बुलेंस को बुलाए या नजदीकी अस्पताल के आपातकाल विभाग में जाएं। श्वसन संबंधी समस्या के लक्षणों में शामिल हैं:

आवाजें निकालना
नथुने फूलना
छाती धंसना (हंसली से उपर, पसलियों के बीच की या पसलियों के नीचे की त्वचा हर सांस के साथ अंदर धंसना)
लगातार तेज सांस लेना
हांफना और सांस लेते हुए आवाजें आना (सांस फूलने की आवाज, सीटी की आवाज या सांस लेते व छोड़ते समय चटकने की सी आवाज आना)

निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन)
यदि शिशु को डिहाइड्रेशन है, तो इसका मतलब है कि उसके शरीर से काफी ज्यादा तरल का ह्रास हो रहा है या वह पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं ले रहा है। यदि जल्द उपचार न किया जाए तो निर्जलीकरण गंभीर समस्या बन सकती है।

नवजात शिशु को पर्याप्त तरल नहीं मिल रहा है, इस बात के संकेत हैं:

शुष्क त्वचा या होंठ
धंसा हुआ कलांतराल (शिशु के सिर पर नरम स्थान)
सामान्य से कम गीली लंगोट (नैपी)
धंसी हुई आंखें
बिना आंसूओं के रोना
गहरा पीला पेशाब
सुस्ती और उनींदापन
तेज सांसे चलना
ठंडे और धब्बेदार हाथ और पांव

नाभिठूंठ से जुड़ी समस्याएं
अधिकांश मामलों में नाभिठूंठ जन्म के पांच से 15 दिनों के बीच में टूटकर गिर जाती है। यदि नाभिठूंठ में संक्रमण (इनफेक्शन) के कोई भी संकेत दिखाई दें तो डॉक्टर से बात करें। इन संकेतों में शामिल हैं:

नाभिठूंठ से दुर्गंध आना, उसके मवाद या लागातार खूना आना
नाभि के आसपास की त्वचा दिखना या सूजन होना इनफेक्शन का संकेत हो सकता है।
गर्भनाल या उसके आसपास की त्वचा को छूने पर शिशु रोने लगता है।

मलत्याग से जुड़ी समस्याएं
जब बात शिशु के मलत्याग की आती है, तो अधिकांश नए माता-पिता के इस बारे में उनके बहुत से सवाल हो सकते हैं। शिशु का मल इतनी सारी रंगत और बनावट लिए होता है कि शायद अनुभवी माता-पिता ने भी इसके सारे रूप न देखे हों। शिशु का मल इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह स्तनपान करता है या फॉर्मूला दूध पीता है।

हालांकि, नवजात शिशु के साथ निम्नांकित स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

घर पर आने के बाद शुरुआती 48 घंटों में शिशु मलत्याग नहीं करता है।
उसे पतले दस्त (डायरिया) है
वह छोटी गोली जैसा ठोस या शुष्क मलत्याग कर रहा है
उसके मल में लाल रंग की धारी या धब्बे हैं, ये मल में खून होने के संकेत हैं।
अत्याधिक फीके रंग का चूने जैसा सफेद मल। यह यकृत (लीवर) से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

शिशु के मल के बारे में यह लेख बताता है कि क्या सामान्य है और क्या नहीं।

नवजात पीलिया
भारत में नवजात शिशुओं में पीलिया होना काफी आम है और जन्म के बाद अस्पताल में ही डॉक्टर आमतौर पर इसके लक्षणों पर नजर रखते हैं।

अधिकांश शिशुओं में नवजात पीलिया अस्थाई होता है और कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। मगर कुछ दुर्लभ मामलों में यह काफी गंभीर होता है, इसलिए इस पर ध्यान देना बहुत जरुरी है।

त्वचा पर पीली रंगत इसका सबसे प्रत्यक्ष लक्षण है। यदि आपके शिशु की त्वचा की रंगत गहरी है, तो यह पीलापन उसकी आंखें के सफेद हिस्सों, मसूंढ़ों या फिर हथेली और पैरों के तलवों पर ज्यादा साफ दिखाई देगा।

अगर आपको अस्पताल से घर आने के बाद शिशु में पीलिया के लक्षण लगें, तो शिशु के डॉक्टर से बात करें।

साथ ही, यदि आपके शिशु को पीलिया हो और वह जाग न रहा हो या चिड़चिड़ा हो या दूध न पी रहा हो या फीकी रंगत का मलत्याग कर रहा हो, तो डॉक्टर से बात करें।

असामान्य ढंग से रोना
शिशु स्वस्थ हो, उसका पेट भी भरा हो और डाइपर बदलने की भी जरुरत न हो तो भी कई बार शिशु बिना वजह रोते हैं। मगर यदि आपको शिशु के रोने की आवाज कुछ सही न लगे तो अपने मन की आवाज पर यकीन करें। बीमार शिशु के रोने की आवाज, भूख या चिड़चिड़ाहट में रोने की आवाज से अलग होती है।

निम्नांकित स्थितियों में डॉक्टर से बात करें:

शिशु सामान्य से ज्यादा रो रहा है और चुप कराने पर भी शांत नहीं हो रहा है।
शिशु काफी उच्च स्वर में रो रहा है, जो कि सामान्य नहीं है।
शिशु रो रहा है और उसे बुखार, उल्टी, दस्त (डायरिया) या चकत्ते जैसे अन्य लक्षण भी हैं।

इसके अलावा यदि शिशु सामान्य से धीमे स्वर में रोए या फिर वह रोए नहीं और सुस्त सा रहे, खुश न लगे और उसे जगाने में मुश्किल हो, तो डॉक्टर से बात करें।

भूख कम लगना या सही से न चूसना
आपके शिशु की भूख हर दिन अलग हो सकती है। मगर, यदि वह भूखा हो, तो उसे काफी जोश व प्रबलता से दूध पीना चाहिए।

यदि शिशु दूध पीना न चाहे, चूसते-चूसते बहुत जल्दी थक जाए या दूध पीने में रुचि न दिखाए तो हो सकता है कि वह बीमार हो। ऐसे में आपको उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

बीमारी के अन्य लक्षण
शिशु को निम्नांकित कोई भी लक्षण हों तो डॉक्टर से बात करें:

खांसी या नाक बहना
लगातार दो बार दूध पीने पर दोनों बार बहुत तेजी से उल्टी कर देना
बार-बार हरे रंग की उल्टी, रक्तरंजित उल्टी या फिर उल्टी में खून आना जो कि डार्क कॉफी जैसा लगे।
उसे संक्रामक नेत्रशोथ (कंजंक्टिवाइटिस) के लक्षण हैं या आंखें लाल हैं और उनमें पानी आ रहा है और चिपचिपी हो रही है।
उसे पेट में तेज दर्द है, ऐसा होने पर वह पर पीठ मोड़ लेगा और टांगों को उपर उठाएगा। हो सकता है उसके पेट में बहुत ज्यादा फुलावट हो रही हो।
उसे चकत्ते हैं और वह बीमार सा लग रहा है। बचपन में होने वाले चकत्तों के बारे में यहां और अधिक जानें।
किसी चीज से सिर टकरा जाने से या पलंग या चेंजिंग टेबल से गिरने की वजह से उसे सिर में गुमड़ा हो गया है या खून आ रहा है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
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